Description
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- आकार: मूली की सबसे आम भारतीय किस्म लंबी, बेलनाकार और सफेद रंग की होती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाल, गुलाबी और काले रंग की छोटी, गोल किस्में भी प्रचलित हैं।
- पत्ते: मूली के ऊपर हरे रंग के पत्ते होते हैं जो खाने योग्य होते हैं और अक्सर इनका उपयोग सब्ज़ी या साग बनाने के लिए किया जाता है।
- स्वाद और बनावट (Taste and Texture):
- मूली की प्रमुख विशेषता इसका तीखा, थोड़ा मसालेदार स्वाद है, जिसमें हल्की कड़वाहट भी हो सकती है। यह तीखापन आइसोथियोसाइनेट्स (isothiocyanates) नामक यौगिकों के कारण होता है।
- यह कच्ची अवस्था में बहुत कुरकुरी (crisp) होती है।
- पकाने पर, इसका तीखापन काफी कम हो जाता है और स्वाद हल्का हो जाता है।
- पाक कला में उपयोग (Culinary Uses):
- सलाद: भारत में मूली को अक्सर छीलकर कच्चा ही सलाद के रूप में खाया जाता है, साथ ही नमक और नींबू का रस मिलाया जाता है।
- पराठा: “मूली का पराठा” उत्तर भारत का एक बहुत ही लोकप्रिय और पसंदीदा व्यंजन है, जिसमें कद्दूकस की हुई मूली भरी जाती है।
- सब्ज़ी/साग: मूली के पत्तों का उपयोग करके ‘मूली का साग’ बनाया जाता है, और जड़ को सब्ज़ियों व करी में भी डाला जाता है।
- अचार: मूली का चटपटा अचार भी बनाया जाता है।
- पोषक तत्व और स्वास्थ्य लाभ (Nutrition and Health Benefits):
- मूली में कैलोरी बहुत कम होती है और यह फाइबर से भरपूर होती है, जो पाचन में सहायक है।
- यह विटामिन सी का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है।
- इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं और यह शरीर को डिटॉक्सिफाई (विषहरण) करने वाले गुणों के लिए जानी जाती है।
- आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, मूली पेट के लिए अच्छी होती है और लिवर के कार्य में मदद करती है।





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