Description
- स्वरूप (Appearance): तोरई एक बेलनाकार, हरे रंग की सब्जी है जो ककड़ी या लौकी जैसी दिखती है। इसकी सबसे खास पहचान इसकी सतह पर लंबी, नुकीली धारियाँ (ridges) होती हैं। भारत में दो मुख्य प्रकार की तोरई मिलती हैं—एक चिकनी (Smooth Gourd) और दूसरी धारीदार (Ridge Gourd)। आमतौर पर धारीदार किस्म ज्यादा खाई जाती है।
- स्वाद और बनावट (Taste and Texture): तोरई का स्वाद बहुत हल्का, थोड़ा मीठा होता है और इसमें कड़वाहट बिल्कुल नहीं होती (बशर्ते वह ताज़ी हो)। इसमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे यह पकने के बाद बहुत नरम और मुलायम हो जाती है।
- वानस्पतिक जानकारी: यह भी कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) परिवार का हिस्सा है, जैसे करेला और लौकी।
- मौसम (Season): यह मुख्य रूप से गर्मी और मानसून की सब्जी है और इन महीनों में यह ताज़ी उपलब्ध होती है।
स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits)
तोरई एक अत्यंत स्वास्थ्यवर्धक सब्जी है, खासकर पाचन और हाइड्रेशन के लिए:
- हाइड्रेशन: इसमें पानी की मात्रा 90% से अधिक होती है, जो शरीर को गर्मियों में हाइड्रेटेड रखने में मदद करती है।
- वजन घटाने में सहायक: कैलोरी में बहुत कम और फाइबर में उच्च होने के कारण, यह वजन प्रबंधन के लिए एक आदर्श सब्जी है।
- पाचन में सुधार: इसका फाइबर पाचन तंत्र को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज को रोकता है।
- पोषक तत्व: इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व होते हैं।
- ठंडा प्रभाव: तोरई की तासीर ठंडी होती है, जो पेट और शरीर को ठंडक देती है।
culinary उपयोग (Culinary Uses)
दिल्ली और उत्तर भारत में तोरई को आमतौर पर बहुत ही सरल तरीके से पकाया जाता है ताकि इसके पानी के तत्व और पोषक तत्व बने रहें:
- सब्जी: इसकी सबसे आम डिश ‘तोरई-टमाटर की सब्जी’ है, जिसे अक्सर हल्की ग्रेवी या सूखी भुजिया के रूप में बनाया जाता है।
- दाल के साथ: इसे अक्सर चने की दाल के साथ मिलाकर पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और पोषण बढ़ता है।
- कोफ्ता: तोरई को कद्दूकस करके उसके कोफ्ते (पकौड़े) बनाए जाते हैं, जिन्हें करी में डाला जाता है।
तो, तोरई उन सब्जियों में से है जिन्हें हल्का भोजन माना जाता है और यह पेट के लिए बहुत आरामदायक होती है।





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